जनता का आदमी
Thursday, June 14, 2012
दख़ल की दुनिया: पूंजीवाद: एक प्रेत कथा- अरुंधति राय
दख़ल की दुनिया: पूंजीवाद: एक प्रेत कथा- अरुंधति राय
: अरुंधती रॉय अरुंधति राय का यह शानदार लेख अपने समय का महाकाव्य है, जब लेखक-संस्कृतिकर्मियों का एक हिस्सा साम्राज्यवादी प्रचारतंत्र का हिस्...
Tuesday, January 24, 2012
कल की बात है पुरानी
दोस्तो मुझे लिखने की बीमारी नही है पर क्या करू जहां रहता हु वहाँ बिना लिखे काम चलता नही है ।
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