कल ही कितना समझाया
था
पर आज देखती हूँ
वही स्थिति .....
खाली बेंच,
आखिर क्यों ?
वो समझ नही पाता ,
ये उसके लिए,
अच्छा नही है |
क्यों इन सब बातो पर
इतना परेशान होता है
क्यों हर बात कि
सजा खुद को देता है|
आशा करती हूँ समझ जाये
जिंदगी को जीना|
नहीं तो बोझिल जिंदगी को
आगे चलाना
मुश्किल हो जायेगा |
डर लगता है जब
अखबार में पढ़ती हूँ
आज एक बच्चे ने .......
या उसने......
इस तरह कि कोई भी
घटना दिमाग को
परेशान कर देती है|
हर पल सोचने व
समझने पर मजबूर
कर देती है ....
कि कैसे वो छोटा
सा बच्चा
जिंदगी के प्रति इतना
बेरहम हो सकता है |
कैसे ?
आखिर कैसे ?
ये सवाल मात्र
मेरा सवाल नहीं
हर उस शख्स के
मन में उठने
वाला सवाल है
जो उस खबर को
पढ़कर पैदा होता है|
जब मैंने
उसे देखा तो पहला
डर मेरे मस्तिष्क में
यही कौंधा
कही यह भी तो.............
पर आज देखती हूँ
वही स्थिति .....
खाली बेंच,
आखिर क्यों ?
वो समझ नही पाता ,
ये उसके लिए,
अच्छा नही है |
क्यों इन सब बातो पर
इतना परेशान होता है
क्यों हर बात कि
सजा खुद को देता है|
आशा करती हूँ समझ जाये
जिंदगी को जीना|
नहीं तो बोझिल जिंदगी को
आगे चलाना
मुश्किल हो जायेगा |
डर लगता है जब
अखबार में पढ़ती हूँ
आज एक बच्चे ने .......
या उसने......
इस तरह कि कोई भी
घटना दिमाग को
परेशान कर देती है|
हर पल सोचने व
समझने पर मजबूर
कर देती है ....
कि कैसे वो छोटा
सा बच्चा
जिंदगी के प्रति इतना
बेरहम हो सकता है |
कैसे ?
आखिर कैसे ?
ये सवाल मात्र
मेरा सवाल नहीं
हर उस शख्स के
मन में उठने
वाला सवाल है
जो उस खबर को
पढ़कर पैदा होता है|
जब मैंने
उसे देखा तो पहला
डर मेरे मस्तिष्क में
यही कौंधा
कही यह भी तो.............
भावना